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गुर्वोपदेश: क्रीम कोटेशन

गुर्वोपदेश: क्रीम कोटेशन

मुनि श्री १०८ संधानसागर जी महाराज

विचारों की सम्पदा सबसे बड़ी सम्पदा होती हैं, विचार ही हमारी वृत्ति बनते हैं वृत्ति हमारी प्रवृत्ति बन जाती हैं। राम और रावण दो व्यक्ति नहीं दो वृत्ति हैं दो विचार हैं अच्छे विचार हमें राम बना देते हैं तो बुरे विचार हमें रावण बनाकर अधोगामी बना देते हैं। पूज्य गुरुवर कहते हैं कि तन को खुराक न मिले तो तन शिथिल हो जाता है और यदि मन को खुराक न मिले तो मन उच्छृंखल हो जाता है। मन या विचारों को संतुलित बनाये रखने के लिए इस पुस्तक में भिन्न-भिन्न विषयों पर चुनिंदा कोटेशन दिये गये हैं। जिन्हें क्रीम कोटेशन कह सकते हैं। ये क्रीम कोटेशन व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने में बहुत सहायक होंगे। कहते हैं खीर खाते हैं तो मीठी डकार आती है और महेरी (मठ्ठा की कढ़ी) खाते हैं तो खट्टी डकार आती है जैसा कारण होता है वैसा ही कार्य होता है जैसा चिंतन होता है वैसा ही जीवन बन जाता है, चिंतन को स्वच्छ, निर्मल और निष्कलंक बनाने के लिए इस कृति को संकलित किया। इस कृति में जो विचार संकलित किये हैं मुझे जहाँ से भी सुनने पढ़ने को मिला वहाँ से लिये गये हैं। एक बात और बता दूं मोक्षमार्ग में मेरे दीक्षा गुरु संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं शिक्षा गुरु मुनि श्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज का सदैव साथ रहा मेरे पास जो भी विचारों की सम्पदा है इन दोनों गुरुओं की हैं इसलिए इस कृति का नाम ही रखा “गुरूपदेश” साथ ही कृति में अन्य साहित्यकारों एवं स्वयं का चिंतन भी आप श्री तक पहुँचाने का लघु पुरुषार्थ किया। ये विचार आपके जीवन को उज्जवल एवं समुन्नत बनायें इसी भावना से गुरुदेव के पावन चरणों में नमोस्तु पूर्वक उन्हीं के कर कमलों में सादर समर्पित है यह कृति...

मुनि संधानसागर