Mobile Patrakarita

Mobile Patrakarita-मोबाइल पत्रकारिता, अवधारणा, सम्भावनाये और तकनीक

द्वितीय परिवर्धित एवं संशोधित संस्करण

प्रभु झिंगरन

प्रशिक्षु और युवा पत्रकार जो मोबाइल पत्रकारिता के क्षेत्र में स्थापित होना चाहते है, उनके लिए तकनीकी और प्रायोगिक जानकारी की दृष्टि से यह एक अनिवार्य पुस्तक है।

-प्रोफेसर बलदेव राज गुप्ता (पूर्व अध्यक्ष, पत्रकारिका एवं जनसंचार विभाग, बी एच यू)

मीडिया जगत में बदलते समय और भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करती, मोबाइल पत्रकारिता पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पुस्तक।
-प्रोफेसर गोपाल सिंह डीन, स्कूल ऑफ़ मीडिया एंड कम्युनिकेशन्स, बाबा साहब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ

आने वाला वक़्त मोबाइल पत्रकारिता और नागरिक पत्रकारिता का ही होगा, ऐसे में भविष्य के प्रश्नों और विकल्पों को तलाशती एक उपयोगी दिशा निर्देशिका साबित होगी यह पुस्तक।
-डॉ० उपेंद्र पांडेय (निदेशक-जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन, कानपुर)

हिंदी में मोबाइल पत्रकारिता विषयक प्रामाणिक सामग्री की कमी को पूरा करती एक उपयोगी पुस्तक।
-डॉ० योगेंद्र पांडेय (विभागाध्यक्ष-पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, छत्रपति साहूजी महाराज, विश्वविद्यालय, कानपुर, उत्तर प्रदेश)

मोजो पत्रकारिता पर लिखी गई एक छात्रोपयोगी तथा प्रायोगिक पुस्तक।
-डॉ० संदीप वर्मा (सह-प्राध्यापक-महात्मा गाँधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा)

सूचना, संवाद और पत्रकारिता के बदलते मानदंडों को रेखांकित करती एक जरूरी किताब। अत्यंत सशक्त और सालार तकनीकी पक्ष मोजो पत्रकारों के लिए विशेष रुप से उपयोगी बन पड़ा है।
-कृष्ण कुमार शर्मा (सहप्राध्यापक एवं विभागाध्क्षय, प्रशिक्षण, मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च संसथान, नई दिल्ली)

हिंदी में पत्रकारिता विषयक मौलिक ग्रंथो का नितांत आभाव है। इस पुस्तक के लिए प्रभु झिंगरन साधुवाद के पात्र हैं।
-विजय शर्मा (पूर्व वरिष्ठ प्रोडूसर- ए.बी.पी. न्यूज़ तथा वर्तमान में आई.आई.एच.एस मीडिया संस्थान ग़ाज़ियाबाद के सहप्राध्यापक)

जनसंचार के नए क्षेत्रों को रेखांकित करती एक उपयोगी पुस्तक।
-राकेश जेटली (सेवानिवृत्त अति. महाप्रबंधक- एनटीपीसी, वर्तमान में सलाहकार - पीटीसी)