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Man Darpan

मन दर्पण

माड़भूषि रंगराज अयंगर

मेरी पहली पुस्तक ‘‘दशा और दिशा‘‘ को पाठकों का अथाह प्यार मिला। मैं समस्त पाठकवर्ग का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त करता हूँ। सुशील तिवारी मनस्वी जी का विशेष तौर पर आभार कि उन्होंने पुस्तक के परिमार्जन हेतु त्रुटियों की सूची प्रस्तुत किया।
इस समय मेरी दूसरी पुस्तक ‘‘मन दर्पण‘‘ प्रकाशित हुई हैं। पुस्तक ‘‘दशा और दिशा‘‘ पर पाठकों की प्रतिक्रिया से इस पुस्तक को गढ़ने में बहुत सहायता मिली। बहुत कुछ सीखा भी।
बिटिया कु. ‘‘राशि अग्रवाल‘‘ ने विशेषकर मेरी पुस्तक ‘‘मन दर्पण‘‘ के लिए ही इसके मुख पृष्ठ का चित्रण किया है। यही मेरे मन दर्पण की वह गुड़िया है, जो पूरी पुस्तक में यहाँ वहाँ फुदकती नजर आती है। मेरी गुड़िया बिटिया राशि का विशेष आभार।
इस पुस्तक की ज्यादातर रचनाएं पहली पुस्तक ‘‘दशा और दिशा‘‘ से पुरानी हैं। कुछेक तो पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो चुकी हैं, पर कुछ अप्रकाशित भी हैं। पर्यावरण पर तुकबंदी ‘‘एक पौधा‘‘ को बहुत सराहा गया। वैसे ही ‘‘धड़कन, सो जा बिटिया रानी, रामायण, आज का रावण, सिंदूर मेरे‘‘ को भी बहुत पसंद किया गया। जहाँ ‘‘मेरा भारत महान‘‘ 1984 के दंगों के वक्त लिखी गई वही ‘‘काश!!!‘‘ 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने पर लिखी गई।
जहाँ ‘‘मुर्दा नाचा, विधि या पतन, ज्ञान का पुनर्दान‘‘ सामाजिक व्यंग्य हैं वहीं ‘‘लाडली, गुड़िया, चंदामामा, वात्सल्य, बचपन, बहना, मेरी गुड़िया‘‘ इत्यादि इंगित कविता हैं।
यह पुस्तक ‘‘मन दर्पण‘‘ वास्तव में भी मेरे मन का ही दर्पण है। मानसिकता को ही कागज पर उतारा गया है। बहुत बड़े हद तक यथार्थता है।
कविता की विधा पर पाठकों रुचि का आदर करते हुए, कविता की समरसता से जनित नीरसता से बचाने का प्रयास किया गया है। जिसके लिए पुस्तक में कुछ कहानी और सम सामयिक लेखों को भी सम्मिलित किया गया है।
बिना प्रकाशकों के सहृदय के किसी भी पुस्तक का प्रकाशन असंभव है। इस पुस्तक के प्रकाशन से संबंधिक हरेक व्यक्ति का में आभार व्यक्त करता हूँ।
विषय वस्तु पर ध्यानाकर्षण करते हुए, मैं अपनी यह पुस्तक उन सभी बच्चों को समर्पित करता हूँ, जिनके बचपन में मैंने अपना बचपन बार - बार जिया है।

-माड़भूषि रंगराज अयंगर
हैदराबाद, तेलेंगाना,
भारत।

  • Buy Now Pre Order Paperback at 175/- delivery by mid of May 2017 (approx)
  • ISBN978-81-933482-3-9